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कम्युनिटी लीडर ने जानकारी के बल पर दिलाया राशन

मार्च 2020- गौर गाँव

सलीमुन पिछले तीन साल से आली से जुड़ी हैं। जेंडर, पुलिस की पहचान, एफआईआर, ग्राम सभा, पितृसत्ता, महिला हिंसा समेत कई मुद्दों पर सलीमुन ने आली से प्रशिक्षण लिया है। खुद एक मज़बूत शख्सियत रखने वाली सलीमुन आज न सिर्फ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं बल्कि समुदाय में भी हाशिए पर मौजूद समाज के लिए काम कर रही हैं। कोरोना काल की इन विषम परिस्थितियों में भी सलीमुन ने अपनी जानकारी के बल पर कई परिवारों को राशन दिलवाया। 

28 व 29 मार्च को हुई चर्चा में कम्युनिटी लीडर सलीमुन को पता चला कि मनरेगा कार्ड धारकों को पैसा लेकर राशन दिया जा रहा है। करीब 30 लोगों को राशन दिया गया है। कोटेदार ने बोला था कि प्रशासन द्वारा ये राशन दिलाया जा रहा है। गौर गांव की बस्ती में सात से आठ लोगों को राशन फ्री में भी बांटा गया है। सलीमुन ने बताया कि कोटेदार का कहना है कि उन्हीं लोगों को राशन मिलेगा जिन लोगों के पास राशनकार्ड है या जिन लोगों के पास मनरेगा का जॉब कार्ड है। 

सलीमुन ने गौर गांव की दलित बस्ती में एक महिला से बात की तो पता चला कि उन्हें और उनके मोहल्ले के नागरिकों को राशन मिलने की कोई जानकारी नहीं है। कब और कैसे राशन मिलेगा, नहीं पता है। पुलिस वाले कहीं जाने नहीं देते हैं। खेतों में काम नहीं करने दे रहे हैं। फसल ख़राब हो रही है। इस पर आली की ओर से सप्लाई इंस्पेक्टर से बात की गई। पहले दिन तो बात नहीं हो पाई। अगले दिन सप्लाई इंस्पेक्टर ने बताया कि पात्र गृहस्थी कार्ड धारकों को राशन के लिए पैसा देना होगा। साथ ही अंत्योदय, मनरेगा कार्ड धारकों को फ्री राशन मिलेगा।  

राशन से जुड़ी जानकारियां इकट्ठा करके सलीमुन ने क्षेत्र की महिलाओं से एक-एक करके बात की। उन्हें राशन से जुड़ी जानकारी दी कि किस तरह वे राशन ले सकती हैं। महिलाओं का कहना था कि कोटेदार एक घंटे के लिए ही दुकान खोलता है। इससे सिर्फ दिन में 10 लोगों को राशन मिल पाता है। जब कम्युनिटी लीडर सलीमुन के कहने पर भी कोटेदार ने दुकान ज्यादा समय पर खोलने की बात नहीं मानी तो सलीमुन ने पुलिस से इसके लिए बात की। पुलिस कर्मी ने कोटेदार से बात की और उसके बाद से ही कोटेदार दिन में दो बार दुकान खोलने लगा। अधिकार आधारित इस हस्तक्षेप से 2-3 दिन के भीतर ही सलीमुन ने कई परिवारों तक राशन की पहुंच बनाई। 

सलीमुन लगातार अपने क्षेत्र में राशन के लिए काम कर रही हैं। वो ज़रूरत होने पर किसी भी स्थानीय अधिकारी से बात कर सकती हैं। जानकारी का इस्तेमाल कर सलीमुन कई परिवारों तक मदद पहुंचा रही हैं।